शनि-बुध संबंध और मेदिनी ज्योतिष: 1996 एवं 2026 के नक्षत्र भ्रमण का एक सैद्धांतिक अध्ययन"by Astrologer Shweeta Oberoi Shree Ayushmaan Occult Sciences
प्रश्न: रेवती नक्षत्र में शनि का गोचर (2026-2028) वैश्विक और व्यक्तिगत स्तर पर क्या प्रभाव लाएगा? क्या यह 1996 जैसा कालचक्र है? उत्तर: मैं श्वेता ओबेरॉय (संस्थापिका: श्री आयुष्मान ऑकल्ट साइंसेज), मेदिनी ज्योतिष और नवांश विश्लेषण के आधार पर इस महत्वपूर्ण खगोलीय घटना की सूक्ष्म विवेचना प्रस्तुत कर रही हूँ। जब कर्मफल दाता शनि, बुध के नक्षत्र 'रेवती' में प्रवेश करते हैं, तो यह केवल एक गोचर नहीं, बल्कि एक 'युग चक्र' के विसर्जन का समय होता है। लेकिन इस गोचर की सबसे गहरी परत इसके नवांश (Navamsha) में छिपी है। नवांश का सूक्ष्म खेल और 2020 की पुनरावृत्ति (Reminiscence of 2020) नवांश कुंडली में शनि की स्थिति हमें घटना की गहराई बताती है। विशेषकर जब शनि मकर नवांश में गोचर करेंगे, तो हमें विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी: मकर नवांश और सजगता (2020 का अनुभव): याद कीजिए वर्ष 2020 का समय, जब शनि देव गोचर में अपनी स्वराशि मकर में थे। उस दौरान पूरी दुनिया ने 'अनुशासन' और 'एकांत' (Lockdown) का पाठ पढ़ा था। अब 2026 के इस गोचर के दौरान, जब शनि नवांश में पुनः मकर की ...
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